Nishkraman Sanskar
निष्क्रमण संस्कार: अर्थ, महत्व, विधि और वैदिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण सनातन वैदिक परंपरा का षष्ठ (6ठा) महत्वपूर्ण संस्कार — शिशु का प्रकृति और बाह्य जगत से प्रथम परिचय सनातन वैदिक परंपरा में मनुष्य के जीवन को श्रेष्ठ, संस्कारित and संतुलित बनाने के लिए 16 संस्कारों का विधान किया गया है। ये… Read more »
Satsang Wali Nagri Chal Re Mana
सतसंग वाली नगरी चल रे मना “सतसंग वाली नगरी चल रे मना पी सत ज्ञान का जल रे मना सतसंग वाली नगरी… इस नगरी में ज्ञान की गंगा, जो भी नहाए हो जाए चंगा मल मल हो निर्मल रे मना सतसंग वाली नगरी… सतसंग के हैं अजब नजारे, बहुत सुहाने… Read more »
Jab Tak Jag Mein Shubh Karmon Ka
जब तक जग में शुभ कर्मों का जब तक जग में शुभ कर्मों का संचित सामान नहीं होगा। अच्छे व बुरे सब कर्मों से जाने पहचाने जाएंगे। जग में है कौन भला ऐसा जिसका इम्तिहान नहीं होगा।। जब तक जग में शुभ कर्मों का संचित सामान नहीं होगा। दुनिया में… Read more »
Namkaran Sanskar
नामकरण संस्कार विधि: अर्थ, महत्व, नियम और वैदिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण सनातन वैदिक परंपरा का पंचम संस्कार — जीवन की पहचान और श्रेष्ठ व्यक्तित्व की शुरुआत सनातन वैदिक संस्कृति में मनुष्य के जीवन को श्रेष्ठ और संस्कारित बनाने हेतु 16 संस्कारों की व्यवस्था की गई है। जन्म के बाद शिशु के… Read more »
Jatakarm Sanskar
जातकर्म संस्कार विधि: अर्थ, महत्व, नियम और वैदिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण सनातन वैदिक परंपरा का चतुर्थ महत्वपूर्ण संस्कार — नवजात शिशु के जीवन का प्रथम वैदिक स्वागत सनातन वैदिक परंपरा में मनुष्य के जीवन को शुद्ध, अनुशासित और श्रेष्ठ बनाने के लिए 16 संस्कारों का विधान है। शास्त्रों के अनुसार क्रम… Read more »
Na To Der Hai Na Andher Hai
न तो देर है न अन्धेर है न तो देर है न अन्धेर है, तेरे कर्मों का ये सब फेर है लाखों तीरथ जाके नहा ले, मिटते नहीं कभी कर्मों के काले नेकी की मन में ज्योत जला ले, और जीवन में कर ले उजाले न तो देर है न… Read more »

